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अपने जमाने के मशहूर अभिनेता जितेन्द्र की लाइफ टाइम अचीवेमेंट
April 7, 2019 • Admin

 

 

 

आज हम बात करने जा रहे हैं, अपने जमाने के मशहूर अभिनेता जितेन्द्र की। अपने समय में अपनी डांसिंग स्टाइल को लेकर फेमस रहे जितेन्द्र को साल 2003 में फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवेमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया और 2006 में इन्हें स्क्रीन लाइफ टाइम अचीवेमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इन्होने लगभग 80 दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया। आइए जानते हैं मशहूर अभिनेता जितेन्द्र की कुछ ऐसे ही खास अंदाज के बारे में।
जितेन्द्र का बचपन का नाम रवि कपूर था, जिसे बाद में इन्होने परिवर्तित कर लिया। इनका जन्म 7 अप्रैल 1942 को हुआ था। इनके पिता का नाम अमरनाथ कपूर और माँ का नाम कृष्णा कपूर है। इनके पिता इमीटेशन ज्वेलरी का काम करते थे। ये पंजाब के रहने वाले थे। जितेन्द्र का जन्म भले ही पंजाब में हुआ हो, परंतु इन्होने अपना बचपन गिर्गौम, मुंबई में बिताया। ये उस समय रामचंद्र नामक बिल्डिंग में एक मिडिल क्लास लोकेलिटी में रहते थे। इनकी आज भी उस जगह से कई यादे जुड़ी हुई है। आज भी हर वर्ष गणेश उत्सव के समय जितेन्द्र वहाँ जाते है और अपनी बचपन की यादों को ताजा करते है। इन्होने अपनी स्कूल की पढ़ाई अपने मित्र राजेश खन्ना के साथ सेंट सेबेस्टियन हाई स्कूल गिर्गौम से की और इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई मुंबई के सिद्धार्थ कॉलेज से पूरी की। यह बहुत बड़ी बात है, कि इन्होने उस समय फिल्मों में आने के बावजूद अपने कॉलेज की पढ़ाई पूर्ण की।
 
जितेन्द्र का एक अभिनेता के रूप में फिल्मी करियर बहुत ही लंबा साल 1960 से लेकर 1990 तक लगभग 30 वर्षो का रहा। इनके फिल्मों में आने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। जब वे अपने पिता के बिजनेस के चलते ज्वेलरी का सप्लाई करने फिल्म इंडस्ट्री गये, तो वहाँ इन्हें वी शांताराम के द्वारा पसंद किया गया, और उनके लुक से आकर्षित होकर इन्हें अपनी फिल्म “नवरंग” के लिए कास्ट करने का फैसला किया। इस प्रकार इन्हें पहला मौका मात्र 17 वर्ष की उम्र में 1959 में मिला। इसके बाद इन्हें दूसरा बड़ा मौका साल 1964 में फिल्म “गीत गाया पत्थरो ने” में वी शांताराम के ही द्वारा दिया गया। परंतु इन्हें सफलता 1967 में फिल्म फर्ज के द्वारा मिली। फिल्म फर्ज के गाने मस्त बहारो का ये मौसम इनका सुपर हीट गाना था, इसमे इनके स्टेप्स लोगों ने बहुत पसंद किये और साथ ही इस गाने में उनके द्वारा पहना गया टीशर्ट और सफेद जूते उनका ट्रेड मार्क बन गये। इसके बाद कांरवा और हमजोली जैसी फिल्मों में जितेन्द्र ने और गानों पर डांस किया। और इनके डांस के ही कारण इन्हें बॉलीवुड में “जंपिंग जैक” नाम दिया गया।
 
इन्होने लगभग 200 हिंदी फिल्मों में काम किया, इनके अलावा कुछ ही और कलाकार होंगे, जिन्होंने उस समय इतनी संख्या में फिल्मों में काम किया होगा। जितेन्द्र ने हवाहवाई गर्ल नाम से मशहूर श्रीदेवी और जया प्रदा के साथ कई फिल्मों में काम किया। इनके साथ की गयी कुछ फिल्मों के नाम संजोग, औलाद, मजाल, जस्टिस चैधरी,मवाली, हिम्मतवाला, जानी दुशमन, तोहफा आदि है, इसके अलावा इन्होने साथ में कुछ तेलगु फिल्मों में भी काम किया है, उस समय इनकी जोड़ी सुपर हीट जोडियो में से एक थी। इसके अलावा जितेन्द्र ने गुलजार साहब के साथ परिचय, किनारा और खुशबू फिल्म में काम किया, इन फिल्मों के कुछ सदाबहार गाने ओ माझी रे, मुसाफिर हू यारो और नाम गुम जायेगा है। इन सुपर हीट गानों को राहुल डेव बर्मन द्वारा कंपोज किया गया, जबकि इसमे किशोर कुमार द्वारा अपनी आवाज दी गयी।
जितेन्द्र को लेकर सबसे चर्चित और हाल ही का विवाद यह है कि उनकी 75 वर्ष की उम्र में उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया। उन पर यह आरोप उनकी दूर की बहन ने लगाया। उन्होंने कहा कि जब वे मात्र 18 वर्ष की थी और जितेन्द्र 28 के तब उन्होंने उनके साथ यह हरकत की थी। इसके लिए जितेन्द्र ने उन्हें खुद टिकिट बुक कर शूटिंग देखने के लिए शिमला बुलाया था और शराब के नशे में उनके साथ यह हरकत की। जितेन्द्र के वकील ने इस मामले में कहा कि यह केवल एक एक्टर की इमेज को नुकसान पहुंचाने की साजिश है। और इस तरह कोर्ट ने इसके संबंध में जितेन्द्र के पक्ष में फैसला किया है।
जितेंद्र ने अपनी बेटी एकता कपूर द्वारा निर्देशित और निर्मित लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में एक बूढ़े आदमी की भूमिका निभाई थी। 2002 में, जितेंद्र को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया। इन सब के अलावा जितेन्द्र अपने मशहूर गानों और उसपर अपने डांस परफॉरमेंस को लेकर भी बहुत फेमस रहें है।