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मोजांबिक में मानवीय सहायता प्रदान करने के भारतीय नौसेना के प्रयास जारी
March 22, 2019 • Admin

 

 

 

 

भारतीय नौसेना की पहली प्रशिक्षण स्वायड्रन के तीन जहाज - सुजाता, सारथी और शार्दूल 19 मार्च से मोजांबिक के पोर्ट बीरा में मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। इन जहाजों को मोजांबिक में 15 मार्च को आए चक्रवाती तूफान ‘इडाई’ के बाद पोर्ट बीरा रवाना किया गया था। इस चक्रवाती तूफान में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था।

पोर्ट बीरा में पहुंचने के बाद से भारतीय जहाज पोर्ट बीरा के निकट बुजी क्षेत्र से 150 से ज्‍यादा लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं। यह क्षेत्र मुख्‍य भूमि से कट गया है। पोर्ट बीरा और गौरा-गौराथे द्वीप में दो अतिरिक्‍त चिकित्‍सा शिविर बनाये गए हैं और 800 से ज्‍यादा  प्रभावित लोगों को चिकित्‍सा सहायता उपलब्‍ध कराई गई है।

भारतीय नौसेना के चेतक हैलिकॉप्‍टर ने स्‍थानीय लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए स्‍थानीय प्रशासन और संयुक्‍त राष्‍ट्र मिशन के साथ मिलकर मुश्किल परिस्थितियों में अनेक उड़ानें भरीं हैं। इन्‍होंने तीन गर्भवती महिलाओं को भी सुरक्षित स्‍थान पर पहुंचाया तथा विश्‍व खा़द्य कार्यक्रम की ओर से उपलब्‍ध करायी गई 500 किलोग्राम सामग्री सहित राहत सामग्री (भोजन और पानी) प्रभावितों तक पहुंचाई।

आईएनएस शार्दूल ने सब्मर्सिबल पम्‍पस का उपयोग करते हुए 10 टन ताजा पानी पहुंचाया। आईएनएस सुजाता द्वारा बंदरगाह प्रशासन को राहत शिविरों के लिए लगभग 2 टन पेयजल उपलब्‍ध कराया गया।

तहस-नहस हो चुके स्कूलों, गिरिजाघरों, अस्पतालों, अनाथालयों जैसे स्थानों पर जहाजों के चालक दल द्वारा स्थानीय सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर सामुदायिक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। जहाजों में स्‍थानीय लोगों और बंदरगाह के कर्मचारियों के लिए कम्‍युनिटी किचन बनाई गई है, जो 24x7 खुली रहती है। अब तक लगभग 450 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है।

इसके अलावा, राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए बीबीसी, टीवीएम मोजाम्बिक और ओएक्सएफडीएम के मीडिया कर्मी हमारे जहाजों पर आ चुके हैं। मीडिया टीम ने बंदरगाह में स्‍थापित किए गए चिकित्सा शिविर का दौरा किया और जहां उन्‍हें जहाजों द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न प्रकार की चिकित्सा सहायता के बारे में जानकारी दी गई।

एचएडीआर ऑपरेशंस जारी हैं और भारतीय नौसेना की पहली प्रशिक्षण स्क्वाड्र के जहाज मोजाम्बिक में अपने प्रवास तक स्थानीय आबादी को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।