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बीजिंग +25 की समीक्षा पर राष्ट्रीय परामर्श
February 1, 2020 • Admin

 

 

 

महिला और बाल विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) महिलाओं ने उन कदमों को कार्यान्विनत करने हेतु, जिनसे जेंडर असमानता की राह की बाधाएं दूर हो सकती है, सभी हितधारकों को प्रेरित करने के लिए बीजिंग+25 की समीक्षा पर एक राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। परामर्श का उद्देश्य उन तात्कालिक कदमों, जिन्हें जेंडर समानता की प्राप्ति के लिए उठाये जाने की आवश्यकता है, के लिए सिविल सोसायटी और भारत की महिलाओं और युवाओं, जीवन के सभी क्षेत्रों से जेंडर समानता के पक्षकारों को एक राष्ट्रीय सार्वजनिक बातचीत में एक साथ लाना था।

उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल अनुसुइया उइके, महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव रवीन्द्र पंवार और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भाग लिया।

परामर्श के उद्देश्यों में पिछले 5 वर्षों में भारत में बीजिंग घोषणा और प्लेटफ़ॉर्म फॉर एक्शन के कार्यान्वयन के लिए प्रगति और चुनौतियों का आकलन करना, सीखे गए सबक पर चर्चा करना, जेंडर समानता और 2030 तक महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्राथमिकता वाले कार्यों पर संवाद करना, उन उभरते क्षेत्रों पर चर्चा करना,  जिनका महिला सशक्तिकरण पर प्रभाव पड़ता है, शामिल थे।

बीजिंग में आयोजित 1995 का चौथा महिला विश्व सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्र की अब तक की सबसे बड़ी सभाओं में से एक था, और दुनिया में जेंडर समानता और महिलाओं के सशक्तीकरण पर दुनिया का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

वर्ष 2020 चौथा महिला विश्व सम्मेलन और बीजिंग घोषणापत्र और प्लेटफार्म फॉर एक्शन (1995) (बीजिंग + 25) के अंगीकरण की पच्चीसवीं वर्षगांठ को चिन्हित करता हैं। एक सदी की एक चौथाई समय में बीजिंग घोषणापत्र और प्लेटफ़ॉर्म फ़ॉर एक्शन (बीपीएफए) की गहन चिंताओं के 12 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई मोर्चों पर, कई नवाचार और प्रगति की गई है।

महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत, बेटी बचाओ बेटी पढाओ का विस्तार सभी 640 जिलों में किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लिंगानुपात में 13 अंकों का सुधार हुआ और यह 918 (2014-15) से बढ़कर 931 (2018-19) तक पहुंच गया, प्राथमिक स्तर पर महिला नामांकन अनुपात 93.55 प्रतिशत का हुआ और लड़कों और लड़कियों के लिए समग्र ड्रॉप-आउट दर में 19.8% की महत्वपूर्ण गिरावट आई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई मातृत्व लाभ कार्यक्रम) के तहत 17.43 लाख से अधिक महिलाओं तक पहुंच बनाई गई और 18.6 लाख से अधिक महिलाओं को सितंबर 2018 तक देश भर में महिला हेल्पलाइन नंबर (181) के माध्यम से संबोधित किया गया।

पुलिस की समग्र जेंडर जवाबदेही में सुधार करने और बल में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, महिलाओं के प्रतिनिधित्व को 33 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए परामर्श जारी किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले 5 वर्षों में 15 अतिरिक्त राज्यों में आरक्षण का विस्तार हुआ है। इसके अलावा, कामकाजी महिलाओं के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, 12 से 26 सप्ताह तक मातृत्व अवकाश की अवधि का विस्तार और कार्य स्थलों में क्रेच की अनिवार्य स्थापना को विधायी संशोधन के माध्यम से प्रभावी बनाया गया है।