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डॉ. हर्षवर्धन 'ग्लोबल कूलिंग पुरस्कार' के निर्णायक प्रतियोगियों की घोषणा करेंगे
November 14, 2019 • Admin

 

 

 

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन एक पुरस्कार समारोह में 'ग्लोबल कूलिंग पुरस्कार' (जीसीपी) के अंतिम प्रतियोगियों के नामों की घोषणा करेंगे। इस समारोह का आयोजन मिशन इनोवेशन कार्यक्रम के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जा रहा है।

दुनिया भर के 31 देशों के अन्वेषकों, स्टार्ट-अप्स, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, और प्रमुख एसी उद्योग निर्माताओं की ओर से जीसीपी को 139 आवेदन मिले हैं। सबसे ज्यादा 45 आवेदन भारत से प्राप्त हुए। इनमें से सात अंतिम प्रतियोगियों को 2 लाख यूएस डॉलर की राशि दी जाएगी जिससे उन्हें भारत में वास्तविक क्षेत्र परीक्षण के लिए दो प्रोटोटाइप विकसित करने होंगे। इस पुरस्कार से कूलिंग प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिस तक शुरू में भारत के लाखों लोगों की पहुंच हो और जो बाद में पूरी दुनिया तक पहुंचे।

मिशन इनोवेशन (एमआई) दरअसल विश्व के स्वच्छ ऊर्जा नवाचार में तेजी लाने के लिए 24 देशों और यूरोपीय संघ की एक वैश्विक पहल है। एमआई ने "बिल्डिंग इनोवेशन चैलेंज की किफायती हीटिंग और कूलिंग' को सात नवाचार चुनौतियों में से एक के रूप में पहचाना है। भारत ने मिशन इनोवेशन चैलेंज संख्या 7 'किफायती हीटिंग और कूलिंग चैलेंज' के लिए एमआई सदस्य के रूप में अपने जुड़ाव को लेकर सहमति व्यक्त की है। एमआई चैलेंज 7 का उद्देश्य कम कार्बन वाली हीटिंग और कूलिंग को सभी के लिए सस्ता बनाना है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के साथ साझेदारी में अमेरिका में 1982 में स्थापित किए गए एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थान और थिंक टैंक 'रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट' के साथ संयुक्त रूप से जीसीपी को शुरू किया है ताकि ऐसे आवासीय कूलिंग उपायों के विकास को तेज़ किया जा सके जिनका खासकर भारतीय संदर्भ में आज के मानक उत्पादों की तुलना में जलवायु प्रभाव बहुत कम हो। जीसीपी का उद्देश्य एक ऐसे आवासीय कूलिंग समाधान का विकास करना है जिसका आज के मानक उत्पादों की तुलना में जलवायु पर असर कम से कम पांच गुना तक कम हो।

डॉ. हर्षवर्धन द्वारा एक साल पहले 12 नवंबर 2018 को जीसीपी की शुरुआत के बाद और जीसीपी में हिस्सा लेने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की घोषणा करने के बाद इस पुरस्कार को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और प्रमुखता मिली है। यह प्रतियोगिता दो साल तक चलती है और यह प्रदर्शन करके दिखाने वाली सर्वश्रेष्ठ नवीन आवासीय कूलिंग प्रौद्योगिकियों को अंतरिम और अंतिम पुरस्कारों में कम से कम 3 मिलियन यूएस डॉलर की राशि का वितरण करेगी। चूंकि विस्तार और बढ़ोतरी भी एक महत्वपूर्ण मानदंड है इसलिए जीतने वाली प्रौद्योगिकी शायद उस वक्त की सबसे प्रभावी प्रौद्योगिकी हो सकती है।

भारत ने इस नवाचार पुरस्कार को 2 मिलियन डॉलर तक के अनुदान के साथ समर्थन करने का प्रस्ताव किया है जो मॉडल ऊर्जा कुशल भवन समेत अपनी नवीन कूलिंग प्रौद्योगिकी के डिजाइनों के कामकाजी प्रोटोटाइप विकसित करने में भारत स्थित टीमों को वित्तपोषित करेगा। इन प्रोटोटाइप के प्रदर्शन का मूल्यांकन एक पर्याप्त लंबाई वाली अवधि तक प्रयोगशालाओं और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों दोनों में किया जाएगा ताकि मजबूत परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

कूलिंग मांग में वैश्विक वृद्धि से दुनिया में इसकी मांग आज की 900 मिलियन यूनिट से बढ़कर 2050 में 2.5 बिलियन यूनिट तक पहुंच जाएगी। एयर कंडीशनिंग पहले से ही बड़े भारतीय शहरों में गर्मियों के 40 से 60 प्रतिशत पीक लोड के लिए जिम्मेदार है और 2030 में पीक डिमांड में ये 140 गीगावॉट का योगदान करने की राह पर है और 2050 तक ये योगदान 300 और 500 गीगावॉट के बीच हो जाएगा। इसी अवधि में विकासशील देशों में इस मांग में पांच गुना वृद्धि देखी जाएगी।

भारत पहले से ही वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 7 प्रतिशत का योगदान देता है और भविष्य में कूलिंग की मांग में वृद्धि न केवल इस प्रभाव को बढ़ाएगी, बल्कि भारत के बिजली क्षेत्र पर एक अनुचित बोझ भी डालेगी। आज 1.2 बिलियन रूम एयर कंडीशनर हैं जो 2050 में 4.5 बिलियन से ज्यादा हो जाएंगे जो अकेले ही 180 गीगावॉट तक कार्बन (सीओ2) उत्सर्जन जोड़ सकते हैं जिससे अब और 2050 के बीच संचयी रूप से वैश्विक तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस कम रखने के पैरिस समझौते के लक्ष्य को हासिल करना लगभग असंभव हो जाएगा।

30 जनवरी से 1 फरवरी, 2018 के दौरान ओटावा में मिशन इनोवेशन (एमआई) पर तैयारी बैठक में हुई चर्चा के अनुसार आरएमआई ने ग्लोबल कूलिंग पुरस्कार में भागीदारी के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से अनुरोध किया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य एक ऐसी कूलिंग तकनीक विकसित करना है जिसे संचालित करने के लिए बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता हो, जो बगैर ओजोन रिक्तीकरण क्षमता और कम वैश्विक तापमान क्षमता के साथ रेफ्रिजरेंट का उपयोग कर सके और जिसमें कम लागत का होने की क्षमता हो। ये प्रतियोगिता भारत विशिष्ट है।

भारत के बड़ी घनी आबादी वाले किसी शहर में एक आम आवासीय इकाई का कूलिंग समाधान डिजाइन करने के लिए इस पुरस्कार ने वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित किया है। दुनिया को आज एक बेहद कुशल कूलिंग तकनीक की जरूरत है, एक ऐसे समाधान की जो लगातार बढ़ते जलवायु परिवर्तन में योगदान किए बगैर या पहले से बोझिल बिजली प्रणालियों पर खर्च का दबाव डाले बगैर हमारी बढ़ती आबादी के आराम के लिए कूलिंग जरूरतों को पूरा कर सके।