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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नियमित पारिश्रमिक/वेतन भोगी कर्मचारियों के बीच लगभग 2.62 करोड़ नए रोजगार सृजित हुए
February 1, 2020 • Admin

 

 

 

रोजगार की योग्यता में सुधार के साथ रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकता रही है। इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति आर्थिक समीक्षा 2019-20 का प्रमुख हिस्सा है जिसे केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि सामान्य शिक्षा लोगों के ज्ञान को बढ़ाता है जबकि कौशल प्रशिक्षण रोजगार के जरूरी योग्यता में वृद्धि करता है और लोगों को श्रम बाजार की जरूरतों को पूरा करने लायक बनाता है।

सरकार के स्कील इंडिया मिशन की एक प्रमुख पहल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना युवाओं को छोटी अवधि का प्रशिक्षण (एसटीटी) मुहैया कराता है और पूर्व शिक्षण मान्यता (आरपीएल) के जरिए उनके कौशल को प्रमाणित कराता है। समीक्षा में पूरे विस्तार से बताया गया है कि पीएमकेवीवाई (2016-20) के तहत 11 नवंबर, 2019 तक पूरे देश में  

69.03 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया। इस बजट पूर्व दस्तावेज में अप्रेंटिस नीति के विस्तार के लिए अप्रेंटिस नियम, 1992 में सुधारों पर भी ध्यान दिया गया है।  

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि महिला कामगारों में रोजगार लायक योग्यता बढ़ाने के लिए सरकार महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाती है। 

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि अतिरिक्त रोजगार के सृजन की कोशिशों के साथ नौकरी की गुणवत्ता में सुधार और अर्थव्यवस्था को औपचारिक रुप देने पर विशेष ध्यान दिया गया। नियमित पारिश्रमिक/वेतन भोगी कर्मचारियों का शेयर 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्ष 2011-12 में 18 प्रतिशत से वर्ष 2017-18 में बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया। संपूर्ण रुप से लगभग 2.62 करोड़ नए रोजगार का सृजन हुआ जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 1.21 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में 1.39 करोड़ रोजगार मिले। समीक्षा में बताया गया है कि नियमित पारिश्रमिक वर्ग में महिला कामगारों के अनुपात में 0.71 करोड़ नए रोजगार के साथ 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी (2011-12 में 13 प्रतिशत से 2017-18 में 21 प्रतिशत) दर्ज की गई। स्वरोजगार वर्ग में कामगारों की संख्या बरकरार रही जबकि कैजुवल श्रमिक वर्ग में 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ वर्ष 2011-12 के 30 प्रतिशत से 2017-18 में 25 प्रतिशत रह गई।

आर्थिक समीक्षा में देश की अर्थव्यवस्था में महिला भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और विधायी उपायों को भी रेखांकित किया गया। इसमें अन्य उपायों के अलावा महिलाओं का मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना और 50 या इससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में क्रेच सुविधा को अनिवार्य करने का प्रावधान शामिल है। समीक्षा में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए महिला शक्ति केंद्र योजना, महिला हेल्पलाइन योजना, वन स्टॉप केंद्रों की स्थापना जैसे पूरे देश में लागू सरकार की पहलों के साथ ही कार्यस्थलों पर महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करने और महिला उद्यमिता को समर्थन देने वाली योजनाओं का भी जिक्र किया गया है।