ALL TOP NEWS INDIA STATE POLITICAL CRIME NEWS ENTERTAINMENT SPORTS CONTACT US
निर्यातकों के लिए उच्च बीमा कवर, सस्ता और सुलभ ऋण, ब्याज दरों में कमी
February 1, 2020 • Admin

 

 

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2020-21 में निर्भिक योजना का घोषणा किया। यह निर्यातकों को उच्च बीमा कवर प्रदान करेगा और छोटे निर्यातकों के लिए प्रीमियम को कम करेगा। वित्त मंत्री ने बजट 2020-21 प्रस्तुत करते हुए कहा कि उच्च निर्यात ऋण वितरण प्राप्त करने के लिए एक नई योजना निर्भिक (NIRVIK) की शुरूआत की जा रही है जिसमें उच्च बीमा कवर, छोटे निर्यातकों के लिए प्रीमियम में कमी और दावे का निपटारा करने के लिए सरल प्रक्रियाओं का प्रावधान है।

उन्होंने आगे कहा कि यह योजना वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के द्वारा तैयार की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत, जिसे एक्सपोर्ट क्रेडिट इंश्योरेंस स्कीम (ECIS) भी कहा जाता है, बीमा गारंटी में मूलधन और ब्याज का 90% तक कवर प्रदान किया जा सकता है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने योजना के अंतर्गत कुछ प्रमुख क्षेत्रों के निर्यातकों द्वारा भुगतान की जाने वाली प्रीमियम में सब्सिडी देने का भी प्रस्ताव रखा है। पिछले साल सितंबर में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, पीयूष गोयल ने घोषणा किया था कि निर्भिक योजना के अंतर्गत 80 करोड़ रुपये से अधिक की सीमा वाले रत्न, आभूषण और हीरा (जीजेडी) क्षेत्र के उधारकर्ताओं को गैर-जीजेडी क्षेत्र के उधारकर्ताओं की तुलना में ज्यादा प्रीमियम दर देना होगा, इन श्रेणी को नुकसान का अनुपात ज्यादा होने के कारण।

एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ईसीजीसी) कवर से भी बैंकों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान किया जाएगा क्योंकि उधारकर्ताओं की क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाकर एए मूल्यांकन एकाउंट में कर दी गई है। बढ़ा हुआ कवर यह सुनिश्चित करेगा कि निर्यातकों के लिए विदेशी और रुपया निर्यात ऋण की ब्याज दरें क्रमशः 4% और 8% से कम हो। ईसीआईएस के अंतर्गत मूलधन और ब्याज दोनों के लिए बीमा कवर के प्रतिशत को मौजूदा औसत 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है।

वर्तमान समय में एक्सपोर्ट क्रेडिट कॉरपोरेशन 60 प्रतिशत तक की ऋण गारंटी देता है। यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्यातकों द्वारा ऋण की उपलब्धता पर चिंता व्यक्त किया गया है। दिसंबर 2019 में भारत का निर्यात 1.8 प्रतिशत घटकर 27.36 अरब डॉलर हो गया और आयात 8.9 प्रतिशत घटकर 357.39 अरब डॉलर रह गया, जिससे 118.10 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।