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रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ने जर्मन संघीय शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक की
November 1, 2019 • Admin

रिपोर्ट : अजीत कुमार

 

 

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' और जर्मन संघीय शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री अंजा कार्लिल्जेक के नेतृत्व वाली जर्मन प्रतिनिधिमंडल के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक दिल्ली में हुई। इस अवसर पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे और सचिव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता अमित खरे भी उपस्थित थे।

इस बैठक के दौरान, दो महत्वपूर्ण सहयोगी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।पहला, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग वाले एमओयू का एक परिशिष्ट था, जिसे एमएचआरडी और बीएमबीएफ द्वारा 11.04.2013 को हस्ताक्षरित किया गया था, जिसके माध्यम से भारत-जर्मन साझेदारी के लिएफंडिंग अवधि को 1 जुलाई, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2024 कर दिया गया।

दूसरे एमओयूपर हस्ताक्षर, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारत और डीएएडी, जर्मनी के बीच "उच्च शिक्षा में भारत जर्मनसाझेदारी" (आईजीपी) के अंतर्गतआनेवाले संयुक्त साझेदारी कार्यक्रमों का विस्तार करने के लिए किया गया, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जर्मनी और भारतीय संस्थानों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिएसहयोग के नए और अभिनव क्षेत्रों को खोलकर; भागीदार संस्थानों को उनकी सहभागिता के लिए शिक्षण और अनुसंधान प्रोफाइलों को विकसित करने में सक्षम बनाना;उच्च शिक्षा में भागीदार संस्थानों के अंतर्राष्ट्रीयकरण की रणनीतियों में महत्वपूर्ण योगदान देने और इस प्रकार से संस्थानों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए।

पोखरियाल ने जर्मन प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए पिछले पांच वर्षों मेंउठाए गए विभिन्न परिवर्तनकारी नए कदमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग (एसपीएआरसी) को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत विभिन्न जर्मन संस्थानों में संयुक्त रूप से 20 अनुसंधान गतिविधियों की शुरूआत की गई हैं।

इसी प्रकार से, भारत और 14यूरोपीय देशों (जर्मनी सहित) के बीच छात्रों और शिक्षकों की संतुलित गतिशीलता में सुधार लाने के उद्देश्य से डीयूओ-इंडिया फेलोशिप की शुरूआत की गई। अंतर्राष्ट्रीय छात्र समुदाय को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 'स्टडी इन इंडिया' कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा इत्यादि से संबंधित लघु अवधि के पाठ्यक्रमों की भी शुरूआत की गई।

मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा जलवायु परिवर्तन सेतटीय बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में अनुसंधान का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया औरजल संसाधनों,तटीय अतिसंवेदनशीलता और तीव्र घटनाओं से संबंधित अध्ययन के लिए अनुकूलन रणनीति अपनाने की बात कही गई। जर्मन मंत्री द्वारा अनुरोध किए जाने पर पोखरियाल ने जर्मनी में योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के पाठ्यक्रमों की शुरूआत करने मेंसहयोगकरने पर सहमति व्यक्त किया, जिन्हें जर्मनी में बहुत लोकप्रियता प्राप्त है।

इस बैठक में लिए गए निर्णयों से, दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में संबंधों को आगे बढ़ाने और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार लाने में मदद मिलेगा, साथ ही यह आपसी हितों वाले विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग की संभावनाओं को तलाश करने की दिशा मेंबहुत आगे तक ले जाएगा।