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उपराष्ट्रपति ने राजनीतिक दलों से जम्मू-कश्मीर पर देश की एकता को प्रभावित करने वाले बयान न देने का आग्रह किया
November 1, 2019 • Admin

 

 

 

भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे जम्मू-कश्मीर पर ऐसे बयान न दें जो देश की एकता को प्रभावित करे और सीमा पार आतंकवाद का समर्थन कर रहे पड़ोसी देश को फायदा पहुंचाए।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर हैदराबाद के एमसीआर एचआरडी संस्‍थान में प्रज्ञा भारती द्वारा आयोजित एक समारोह में बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनुच्छेद 370 की कमजोर पड़ने का मतलब जम्मू-कश्मीर के लोगों को सशक्त बनाना और उन तक सभी कानूनों का विस्तार करना था।

अनुच्छेद 370 को निष्‍प्रभावी बनाने को एक सामान्‍य प्रशासनिक व्‍यवस्‍था करार देते हुए उन्होंने कहा कि देश भर के लोगों को इससे खुशी हुई क्योंकि उन्हें लगा कि अब वास्तविक एकता हासिल हुई है। सरदार को यूनिफायर ऑफ इंडिया यानी भारत का एकीकरण करने करने वाला बताते हुए उन्होंने सरदार पटेल का उल्‍लेख करते हुए कहा कि उनकी नजर एकता और कहीं अधिक एकता पर थी। उन्होंने महसूस किया कि देश में अब एकता और कहीं अधिक एकता की आवश्यकता थी।

नायडू ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को भारत की एकता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हमारे महान एवं दूरदर्शी नेता सरदार वल्लभभाई पटेल को सम्मानित करने का सबसे अच्छा और एकमात्र तरीका था जिन्होंने हमारे देश के ऐतिहासिक कैनवास पर एक अमिट छाप छोड़ी।

उपराष्ट्रपति ने भारत को एकजुट करने के लिए सरदार पटेल जैसे नेताओं द्वारा किए गए दमदार प्रयासों और बलिदानों से युवाओं को अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अखंड भारत के निर्माण के लिए सरदार पटेल के शानदार योगदान पर स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में एक विस्तृत अध्याय शामिल करने का सुझाव दिया।

सरदार पटेल ने देश में न केवल भौगोलिक एकता बल्कि सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक एकता लाने पर भी गंभीरता से ध्यान दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा, 'पटेल ने भारत को एकजुट करने की जिम्‍मेदारी संभाली और अपनी चतुराई, धैर्य, शांति एवं गरिमापूर्ण अनुनय से इस मिशन में सफल हुए।'

सरदार पटेल को भारत के स्टील फ्रेम- सिविल सेवाओं के मुख्य वास्तुकार के रूप में बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय सेवाओं को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण बल के रूप में परिकल्पित किया।

पूर्व उपप्रधानमंत्री के नेतृत्व गुण एवं दृढ़ संकल्प के बारे में बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को एकजुट करने में पटेल का योगदान हमेशा के लिए विश्व इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहेगा।

तत्कालीन निजाम द्वारा शासित हैदराबाद राज्य सहित तमाम जटिल परिस्थितियों से सरदार पटेल ने काफी चतुराई से निपटा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पटेल ने अपनी असाधारण दृढ़ता और नेतृत्‍व कौशल से असंभव को भी संभव कर दिखाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न रियासतों ने भारतीय संघ में शामिल होने की उनकी अपील को स्वीकार कर लिया था क्योंकि उन्होंने लोगों के बीच संस्कृति एवं भावना की मौलिक समरूपता पर जोर देते हुए सब की भलाई के लिए उनसे भारत में शामिल होने का अनुरोध किया था।

साथ मिलकर एक नए भारत के निर्माण के लिए सरदार पटेल द्वारा कई साल पहले किए गए आह्वान का उल्‍लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोगों से एक मजबूत, एकजुट, दूरदर्शी भारत के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्प लेने का आह्वान किया जहां हरेक नागरिक सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा महसूस करे और खुशहाल जीवन यापन करे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सब का समावेश एवं कल्याण एकता की अवधारणा के केंद्र में होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पटेल चाहते थे कि भारतीय राज्य सहयोग करें और वे भारत को नई महानता की ओर ले जाने के लिए काम करें। उन्‍होंने कहा कि संयोग से यह वर्तमान सरकार के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के दृष्टिकोण को प्रतिध्वनित करता है।